भारत देश का गणतंत्र दिवस परम पूज्यनीय श्री माताजी की उपस्थिति में पुणे प्रतिष्ठान में मनाया गया
आज २६ जनवरी २००९ के दिन सुबह कुछ सहजयोगियों ने प्रतिष्ठान में अपने परम पूज्यनीय श्री माताजी के चरण कमलों पर प्रार्थना एवं श्रद्धा समर्पित करते हुए भारत देश का गणतंत्र दिवस मनाया। यह दिवस भारत के लिए अत्यन्त महत्वपूर्ण हैं। श्री माताजी ने अपने सभी बच्चों को आशिर्वादित किया एवं भारत के ध्वज के प्रति अपना आदर दिखाया (ध्वज बहुत ही सम्मानपूर्वक उनके सामने गुलाब की पंखुडियों पर रखा गया था)। श्री माताजी सभी योगियों की तरफ़ बहुत ही गहरी नज़र से देख रहे थे जैसे वे उन्हें देश के प्रति समर्पण, भक्ति एवं सम्मान रखने का महत्त्व याद दिला रहे थे। यह दिन हमें याद दिलाता हैं के किस तरह पूर्व दिनों में श्री माताजी ने हमें मातृभूमि के प्रति सम्पूर्ण समर्पण रखना तथा भ्रष्टाचार एवं लोभ से बचके रहना सिखाया हैं। उन्होंने 'देशमाता' अर्थात मातृभूमि इस शब्द का अर्थ एवं महत्त्व हमारे जीवन में माँ से भी बढ़कर होना चाहिए यह भी सिखाया और कहा के देश-भक्ति ही हमारे श्रद्धा की नींव हैं।
श्री माताजी ने समय दर समय सभी सहजियों को यह भी याद दिलाया हैं की अगर हम स्वयं के देश से प्यार न करें तो परमात्मा से एकाकार कभी नहीं हो सकते। देश के प्रति भक्ति तभी आ सकती हैं जब हमें अपने आस-पास की सृष्टि का अन्तरंग ज्ञान हो। एक बार श्री माताजी ने सच्चे ज्ञान की बुनियादी बातों के बारे में बोलते हुए कहा था के हर किसी को अपने राष्ट्रिय गौरव के बारे में पता होना चाहिए। कोई भी राष्ट्रीय गौरव जैसे की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, साधू संत एवं आत्म-साक्षात्कारी पुरूष, कलाकार, स्वतंत्रता सेनानी, सबसे सुंगधित फूल, सबसे ऊँचा पर्वत; पवित्र मन्दिर और महानतम वास्तुकला के उदहारण। क्यूंकि वे हमेशा चाहती थी के हमें समझना चाहिए की किस तरह ब्रिटिश, चाइनीज, रुसी और अमरीकी लोगों को अपने सम्बंधित देशों के हर विषय के बारे में (उनका भूगोल, कृषि उपज, उनका इतिहास और संस्कृति) ख़बर रहती हैं एवं किस प्रकार वे उन सम्बंधित देशों के नागरिक होने का गर्व महसूस करते हैं।
श्री माताजी हमेशा ही भारत के लोगों के बारे में चिंतित रही हैं। उनकी सबसे बड़ी चिंता यही थी की लोगों की अपने देश के प्रति ज्ञान एवं आस्था वक्त के साथ कम होती जा रही हैं। वे हमेशा चाहती थी एवं उन्होंने हमेशा सिखाया की हमें देश-भक्ति बढ़ाने की जरुरत हैं और हमें अपने देश में बनी हुई वस्तुओं का ही उपयोग करना चाहिए तथा यहांके छुपे हुए नैसर्गिक खजानों को खोजना चाहिए और यह भी समझना चाहिए की क्यूँ बाहर के लोग हवाई अड्डे पर उतरते ही जमीन को चुमते हैं। अभी इस वर्त्तमान काल में हमें अपने देश की बुराइयों को जान के उन्हें सुधारने के लिए उनके ऊपर अपना साक्षात्कारी चित्त डालने की आवश्यकता हैं। श्री माताजी ने हमें यह भी कहा हैं की किस प्रकार हम सब सामूहिकता से चित्त डालके कई राष्ट्रिय समस्याओं को आश्चर्यजनक तरीके से हल कर सकते हैं। आत्म-साक्षात्कारी होने के नाते यही हमारी देश-सेवा होगी। आदर्श सहजयोगी बनकर कठिन समस्याओं का सामना करते हुए उन्हें हल करना ही हमारा मुख्यतम कार्य हैं। क्यूंकि देश-प्रेमियों को परमात्मा हमेशा मदद करते हैं। अपने पूर्व सन्देशो में श्री माताजी ने यह भी कहा हैं की दया, धैर्य और समर्पण से ही हम सारे जाती-धर्मों के लोगों को एकत्रित ला कर भाईचारा स्थापित कर सकते हैं। उन्होंने प्रेम के महत्त्व पर भी जोर दिया हैं। हृदयों को जितने के लिए सभी तथ्यों, सबूतों और भाषणों से ज्यादा महत्वपूर्ण हैं प्रेम! प्रेम से सभी को जितना और सत्य की राह पर चलना ही सबसे महानतम मंत्र हैं।
जब हम श्री माताजी के सम्मुख यह सारे मुख्य दिवस मनाया करते थे, उन पूर्व दिनों के इन सन्देशो को आज याद करते हुए हमें हमारा योगी होने का दाइत्व भी याद आया हैं। श्री माताजी आपने आज हमारी देश-भक्ति और देश के प्रति अपनेपन को उजागर किया। हे करुणामयी माँ आपको कोटि कोटि प्रणाम। माँ हमें देश के प्रति समर्पित नागरिक बनाए यही हम आज प्रार्थना करते हैं।
संयोग से यह मांगल्यपूर्ण दिवस 'आस्ट्रेलियन दिवस'(२६ जनवरी) भी हैं। पर सारे सहज परिवार के लिए एक अत्यन्त शुभ समाचार यह हैं की अपने आदरणीय श्री सी. पी. जी को पद्म विभूषण पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा। जो की भारत का दूसरा महानतम नागरिक पुरस्कार हैं। उन्हें १९७२ में पद्म भूषण पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया था। यह पुरस्कार भारत के राष्ट्रपति के हाथों दिया जाएगा। यह हम सारे सहजयोगियों के लिए बहुत ही खुशी की ख़बर हैं। हम सारे विश्व भर के सहजी भाई-बहन श्री माताजी को धन्यवाद् करते हैं क्यूंकि उन्होंने हमें इतनी बड़ी खुश-ख़बरी और आनंद से आशिर्वादित किया।
आदरणीय श्री सी. पी. - हमारे प्यारे पापाजी, हम सारे सहजयोगी आप पर गर्व महसूस करते हैं। विश्व के सभी सहजियों की तरफ़ से हम आपको राष्ट्रपति द्वारा यह महानतम सम्मान पाने की खुशी में हार्दिक बधाइयाँ देते हैं।
हमारे प्यारे एवं करुणामयी माँ, हम सारे संसार के सहजयोगी आपके चरणों में हमारी प्रार्थनाएं और कोटि कोटि प्रणाम समर्पित करते हैं। इन्हें स्वीकार करें. Amen!
जय श्री माताजी!

